खालसा पंथ की सृजना क्यों की थी?

वाहिगुरू जी का खालसा ।।
वाहिगुरू जी की फतेह ।।

आज बैसाखी का दिन है । इसी दिन हमारे दशम गुर गोबिंद सिंघ जी ने खालसा पंथ की सृजना की थी । कैसे की थी ? कौन-कौन थे ? कहां से आए थे ? ये तो हम भली भांति जानते हैं, इस कहानी के पीछे मैं नही जाऊंगा । मैं इन सबसे अलग बात करूंगा जो करनी चाहिए थी मगर आज तक किसी ने की ही नहीं । करनी चाहिए थी । मुझे याद है इसी दिन बिहार में जब गुर गोबिंद सिंघ जी के जन्म दिन पर ३५० वर्षिय प्रकाश उत्सव मनाया गया था । वहां पर भी कुछ ऐसी बातों का जिक्र था । हमसे पूछा गया, पांच प्यारे साजे गए, यह हम कहते हैं । उन्होंने हमारे  लिए सरवंश बलिदान कर दिया । ये हम जानते हैं, रोज ये बातें करने से कोई फायदा नहीं ।

सवाल यह है कि क्या जरुरत थी जिस वजह से पांच प्यारे साजे गए ? जिस मकसद के लिए वो कार्य किया था क्या आज वो पूरा हो गया ? अगर नहीं हुआ तो क्यों नहीं हुआ और अब अब कैसे होगा ? क्या उसके लिए हमने कभी सोचा है ? इस सवालों पर विचार करने की बजाए हम और दूसरी बातों में उलझे रहते हैं । क्या फायदा उन बातों का ? जो गाड़ी पटरी से उतर गई, उसे पटरी पर वापिस कैसे लाया जाये ? ये बात तो हम कभी करते ही नहीं | पुराना इतिहास दोहराते रहते हैं जिसका कोई फायदा नहीं |  जैसे पुराने योद्धा हुए हैं, खालसा हुआ है, आज वैसा क्यूं नही है ? कैसे होगा ? आज के दिन अगर कुछ करना है तो इन बातों पर विचार करने की जरुरत है । दशम पातशाह ने अपने जीवन के मकसद का जिक्र दशम ग्रंथ में हमें लिख दिया, परन्तु जिसको हम (ना मानने वाले) मानते ही नहीं कि ये दशम पातशाह का ग्रंथ है । अगर हम दसम ग्रंथ का विरोध करते है तब कैसे सिख्ख़ है हम , कैसा खालसा हैं हम ? क्या करने जा रहें है ?  क्या कर सकते हैं ? क्या करेंगे ? क्यूं नही किया ? दसम पातशाह ने दसम ग्रंथ में लिखा है  कि मैंने जन्म क्यूं लिया है ?  वो कहिते हैं …

याही काज धरा हम जनमं ।।
समझ लेहु साधु सभ मनमं ।।
धर्म चलावान संत उबारन ।।
दुष्ट सभन को मूल उपारिन ।। ४३ ।।
– श्री दसम ग्रंथ, बचित्र नाटक

धर्म चलावन, धर्म को चलाने के लिए खालसा पंथ को अपना उत्तराधिकारी माना | धर्म की गाड़ी चलती रहे । ये पटरी से ना उतरे यही कार्य वो करने आए थे, वही कार्य खालसे ने करना है, और खालसा बहुत समय तक वो कार्य करता भी रहा है ।

भगतों ने धर्म गाड़ी चलाई थी लेकिन पटरी से उतार दी गयी । गुर नानक फिर इसे पटरी पर ले कर आए थे । उन्हें पता था कि इस गाड़ी को पटरी से उतरने वाले बेहद चोकस हैं, वो बाद में इसे पटरी से उतार देंगे, और ये उतार दी गई अब ।

🔰 वीडियोhttps://youtu.be/fEElFxB-HcY

Categories गुरमत विचारTags , , , , , , , , , , , , , , , , , ,

Leave a Reply

Please log in using one of these methods to post your comment:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

%d bloggers like this:
search previous next tag category expand menu location phone mail time cart zoom edit close