🔰 𝐒𝐞𝐦𝐢𝐧𝐚𝐫 𝟐𝟎𝟐𝟏 – ईमानदारी के बिना सुशासन संभव नहीं ★ 𝐆𝐨𝐨𝐝 𝐆𝐨𝐯𝐞𝐫𝐧𝐚𝐧𝐜𝐞 𝐢𝐬 𝐧𝐨𝐭 𝐩𝐨𝐬𝐬𝐢𝐛𝐥𝐞 𝐰𝐢𝐭𝐡𝐨𝐮𝐭 𝐡𝐨𝐧𝐞𝐬𝐭𝐲

🔰 𝐈𝐧𝐬𝐢𝐠𝐡𝐭𝐬 𝐚𝐭 𝐒𝐞𝐦𝐢𝐧𝐚𝐫 𝟐𝟎𝟐𝟏 𝐛𝐲 𝐃𝐡𝐚𝐫𝐚𝐦 𝐒𝐢𝐧𝐠𝐡 𝐍𝐢𝐡𝐚𝐧𝐠 𝐒𝐢𝐧𝐠𝐡 𝐨𝐧 ईमानदारी के बिना सुशासन संभव नहीं ।

🔰 𝐈𝐧𝐬𝐢𝐠𝐡𝐭𝐬 𝐚𝐭 𝐒𝐞𝐦𝐢𝐧𝐚𝐫 𝟐𝟎𝟐𝟏 𝐛𝐲 𝐀𝐥𝐥𝐚𝐦𝐚 𝐒𝐲𝐞𝐝 𝐀𝐛𝐝𝐮𝐥𝐥𝐚𝐡 𝐓𝐚𝐫𝐢𝐪 𝐨𝐧 ईमानदारी के बिना सुशासन संभव नहीं ।

🔰 𝐈𝐧𝐬𝐢𝐠𝐡𝐭𝐬 𝐚𝐭 𝐒𝐞𝐦𝐢𝐧𝐚𝐫 𝐛𝐲 𝐌𝐚𝐮𝐥𝐚𝐧𝐚 𝐌𝐨𝐝𝐡 𝐀𝐣𝐚𝐳𝐮𝐫 𝐑𝐚𝐡𝐦𝐚𝐧 𝐒𝐡𝐚𝐡𝐞𝐞𝐧 𝐐𝐚𝐬𝐦𝐢 ईमानदारी के बिना सुशासन संभव नहीं।

🔰 𝐈𝐧𝐬𝐢𝐠𝐡𝐭𝐬 𝐚𝐭 𝐒𝐞𝐦𝐢𝐧𝐚𝐫 𝐛𝐲 𝐀𝐝𝐯 𝐀𝐝𝐤𝐚𝐫 𝐌𝐚𝐤𝐚𝐫𝐚𝐧𝐝 𝐃𝐚𝐲𝐚𝐧𝐞𝐬𝐡𝐰𝐚𝐫 𝐒𝐞𝐦𝐢𝐧𝐚𝐫 𝟐𝟎𝟐𝟏 𝐨𝐧 ईमानदारी के बिना सुशासन संभव नहीं ।

🔰 𝐈𝐧𝐬𝐢𝐠𝐡𝐭𝐬 𝐚𝐭 𝐒𝐞𝐦𝐢𝐧𝐚𝐫 𝐛𝐲 𝐑𝐚𝐣𝐯𝐢𝐧𝐝𝐞𝐫 𝐒𝐢𝐧𝐠𝐡 𝐁𝐚𝐢𝐧𝐬 𝐒𝐞𝐦𝐢𝐧𝐚𝐫 𝐨𝐧 ईमानदारी के बिना सुशासन संभव नहीं ।

✍ असीमित विकास ना कभी प्रकृति द्वारा स्वीकार किया गया हैं और ना ही कभी किया जाएगा।

✍ गुरबाणी जो कहती है उसे कभी रद्द नहीं करती, परंतु जिस को रद्द कर देती है उसे कभी नहीं मानती ।

✍ ਜਿਵੇਂ ਪਾਣੀ ਵਿੱਚੋਂ ਉੱਠਣ ਵਾਲੀ ਲਹਿਰ ਨਵੀਂ ਹੁੰਦੀ ਹੈ, ਉਸੇ ਤਰ੍ਹਾਂ ਅੰਦਰੋਂ ਆਉਣ ਵਾਲਾ ਫੁਰਨਾ ਨਵਾਂ ਹੁੰਦਾ ਹੈ।

✍ खुशकी पे है एक सिंह, है दरिया में भी निगरानीहर लहर है आगाहे निहंग, हर मौज है सैलानीकह दो – कभी तलवारों महाफिज थी धरम कीयह बाबा हु नूरानी, और तलवारें भी रूहानी

✍ ਜਿਵੇਂ ਜਾਗ ਲਗਾਉਣ ਨਾਲ ਦੁੱਧ ਜੰਮ ਜਾਂਦਾ ਹੈ । ਇਸੇ ਤਰਾਂ ਜਾਗਣ ਨਾਲ ਮਨ ਡੋਲਣੋਂ ਬੰਦ ਹੋ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ।

✍ एक दायरे में ही हमारा दिल धड़कता है, अगर कम धड़कता है तब भी हानिकारक है, अगर यह अधिक धड़कता है तो भी हानिकारक है। इसलिए हमारा विकास भी एक दायरे में होना चाहिए।

✍ गुरबाणी जो कहती है उसे कभी रद्द नहीं करती, परंतु जिस को रद्द कर देती है उसे कभी नहीं मानती ।

✍ धर्म के इतिहास में आज तक सिवाए रामचन्द्र के कोई भी अशबमेद्ध यज्ञ कर नहीं हारा मगर जो हारा है बह भगवान है जिन्हो ने हराया है उनका नाम तक नहीं है ।

✍ जब सच को छोड़ कर झूठ के सहारे एक दूसरे को नीचा दिखाने की कोशिश होती है तो उसमे से झगड़े पैदा होते हैं ।

✍ जैसे पानी में रहने वाले जीवों का पानी नहीं घटता, ऐसे ही संतोख में रहने वाले का कुछ भी नहीं घटता ।

✍ राम चंद्र का तो अपना लोक परलोक ख़राब है उसकी पूजा करने से तुम्हरा कैसे लोक परलोक सुधर जाएगा ।

✍ जैसे शरीर का कोहड़ रोग शरीर के अंगो को गला देता है वैसे ही आत्मा का कोहड़ रोग ‘अहंकार’ अक्ल को गला देता है ।

संसार शक्ल के श्रृंगार को श्रृंगार मानता है, धर्म अक्ल के श्रृंगार को श्रृंगार मानता है

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